ऐसे मनाएं मकर संक्रांति ,मनोकामना होगी सफल
23 वर्षों बाद बन रहा है महत्वपूर्ण संयोग -
ज्योतिषाचार्य विशाल पोरवाल
मकर संक्रांति का त्योहार करीब है ,ऐसे में कुछ खास बातों का ध्यान रखकर इस त्योहार को मनाने से आपकी सभी मनोकामना सफल रहेगा .
माघ कृष्णापक्ष मास में मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 दिन बुधवार को दोपहर 03 बजकर 13 मिनट से सूर्य धनु राशि से मकर राशि उत्तर मुख हो रहे है मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण हो जाते है उस दिन को देवताओं का दिन कहा गया है, यह दिन आध्यात्मिक और आस्था का प्रतीक है ऐसा माना जाता है कि इस काल में किए गए अच्छे कर्म एवं काम का फल बहुत जल्दी ही प्रदान होते है,
इस समय का उल्लेख महाभारत काल में मिलता है महाभारत में ही इस बात का जिक्र है कि जब सूर्य उत्तरायण हुए तभी भीष्म पितामह ने शुभ समय आने पर अपनी देह त्याग किया था , मोक्ष और पुण्य से ये जोड़ा व पर्व माना गया है इस समय गंगा,यमुना,आदि नदियों में पवित्र तीर्थ जल में स्नान करने से फल प्राप्त होता है, ऐसा माना जाता है कि इसी काल में मन व आत्मा की शुद्धि होती है तथा इस दिन किया गया दान सभी अनिष्ठाओं पापों को खत्म करता है इस दिन कालेतिल,गुड़,खिचड़ी,मूंगदाल, काले उरंद, अनाज और ऊनि कम्बल, ऊनि कपड़े का दान करना विशेष शुभ माना जाता है जिससे शनि ग्रह के दोष व शांति के लिए और नौ ग्रहो की शन्ति व अपनी राशि अनुसार वस्त्र गरीब व्यक्ति ब्राह्मण को दान करें, यह समय शुभ माना जाता है लेकिन दान पुण्य करना बेहद शुभ माना गया है
मकर संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी 2026 से 03 बजकर 13 मिनट से आरंभ हो रहा है व दोपहर 15 जनवरी 2026 दिन (गुरुवार )को 01 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, यह पुण्यकाल 14 जनवरी रात्रि 9 बजकर 39 मिनट से शुरू हो रहा है तथा शास्त्रों के अनुसार ये अवधि 8 से 16 घंटे की होंगी तथा 15 जनवरी 2026 सूर्य उदयकाल में 06 बजकर 05 मिनट विशेष पुण्य काल का समय निर्धारित है , जिसमें किया गया स्नान दान और पूजा कई गुना अच्छा फल प्रदान करता है तथा अच्छे कर्म व पुण्य की प्राप्ति होती है और सुख समृद्धि का वास होता है .
मकर संक्रांति केवल धार्मिक पर्व ही नहीं है बल्कि कृषि और मौसम के बदलाव में बहुत गहराइयों से जुड़ा हुआ है ,देश के कई राज्यों में इसे अलग-अलग नाम से जाना जाता है जैसे पोंगल,भोगली बिहू,लोहड़ी,आदि इस कृतज्ञ और नए वर्ष आरंभ की खुशखबरी का प्रतीक माना जाता है और सूर्य अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ता है व्यक्ति को एक नए प्रकाश के रूप में दर्शता है, भगवान विष्णु की पूजा भी करनी चाहिए और सूर्य भगवान को जल देना चाहिए तथा " ॐ सूर्याय नमः" का जाप करते हुए लाल पुष्प डालकर तांबे के लोटे में जल अर्पण करें तथा यह काल मकर संक्रांति का संयोग लगभग 23 वर्षो बाद बन रहा है ,
इस दिन षटतिला एकादशी का संयोग भी बन रहा है इससे पहले इसके दुर्लभ संयोग से पूजा - पाठ का विधान महत्व बढ़ जाता है इस दिन दो शुभ योग बन रहे है...सर्व सिद्धि योग और अमृतसिद्ध योग का बहुत बड़ा महत्व है इस बार मकर संक्रांति के दिन षटतिल एकादशी का संयोग भी बन रहा है । 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव के साथ में भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा एकादशी होने के कारण इस दिन चावल का सेवन करना वर्जित है, इसके अगले दिन ही षटतिल द्वादशी है जिसका पूरा दान पुण्य स्नान आदि कर्मो का आपको पूर्ण फल मिलेगा .


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